मिर्जापुर: द मूवी की कास्ट फीस: पंकज त्रिपाठी, अली फज़ल ने कितनी फीस ली?

मिर्जापुर: द मूवी: कालीन भैया से लेकर गुड्डू पंडित और मुन्ना त्रिपाठी तक, मिर्जापुर के OG कलाकार एक बार फिर वापसी कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि किस कलाकार ने के फिल्म लिए कितनी फीस चार्ज की है।

पंकज त्रिपाठी: रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंकज त्रिपाठी ने मिर्जापुर में आइकॉनिक कालीन भैया के किरदार में वापसी के लिए 15 करोड़ रुपये चार्ज किए हैं। अगर यह रिपोर्टेड आंकड़ा सही है, तो वह फिल्म के सबसे ज्यादा फीस लेने वाले अभिनेता हैं।

अली फज़ल: अभिनेता एक बार फिर गुड्डू पंडित के किरदार में नजर आएंगे। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने फिल्म के लिए करीब 4 करोड़ रुपये फीस ली है।

दिव्येंदु शर्मा: अभिनेता फिल्म में एक बार फिर दर्शकों के पसंदीदा मुन्ना त्रिपाठी के किरदार में वापसी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्हें करीब 3 करोड़ रुपये फीस दी गई है।

जितेंद्र कुमार: वह मिर्जापुर फ्रेंचाइज़ी में बाबलू पंडित उर्फ यादव जी के किरदार में शामिल हो रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अपनी भूमिका के लिए करीब 1.5 करोड़ रुपये चार्ज किए हैं।

श्वेता त्रिपाठी: वह एक बार फिर गोलू गुप्ता के किरदार में नजर आएंगी, जो मिर्जापुर यूनिवर्स के सबसे अहम किरदारों में से एक है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें इस भूमिका के लिए करीब 95 लाख रुपये फीस मिली है।

Flickonclick की एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म को करीब 250 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट में बनाया गया है। हालांकि, मेकर्स की ओर से अभी तक इस बजट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

Amazon MGM Studios और Excel Entertainment द्वारा प्रस्तुत इस फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि इसकी कहानी और लेखन पुनीत कृष्णा ने किया है। फिल्म को रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर ने Excel Entertainment के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। फिल्म के को-प्रोड्यूसर कासिम जगमगिया और विशाल रामचंदानी हैं।

मिर्जापुर: द मूवी4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

दूसरे सप्ताह में पहुंची “दिल दीवाना हो गया”, पंजाब, दिल्ली-यूपी और मुंबई में दर्शकों का मिला भरपूर प्यार

ग्रैंडवे प्रोडक्शंस के बैनर तले निर्माता ईशपॉल सिंह चावला की रोमांटिक फैमिली ड्रामा फिल्म “दिल दीवाना हो गया” सफलतापूर्वक अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है। देशभर में दर्शकों ने फिल्म को सराहा है, जबकि पंजाब, दिल्ली-यूपी और मुंबई में फिल्म को विशेष रूप से अच्छा प्रतिसाद मिला है।

Poster

फिल्म ने रिलीज के पहले सप्ताह में देशभर के 192 सिनेमाघरों में प्रदर्शन किया, जो नए कलाकारों के साथ बनी किसी फिल्म के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है। दूसरे सप्ताह में फिल्म मेरठ के देवगन सिनेमा में भी प्रदर्शित की जा रही है, जहां दर्शकों का उत्साह देखने को मिल रहा है।

फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि नए कलाकारों को लेकर फिल्म बनाना और उसे बड़े स्तर पर रिलीज करना आसान काम नहीं है। ऐसे समय में निर्माता ईशपॉल सिंह चावला बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने दिल से यह फिल्म बनाई और नए कलाकारों को अवसर दिया। चावला का मानना है कि इंडस्ट्री में नए कलाकारों को भी ब्रेक मिलना चाहिए और अगर कहानी अच्छी हो तो दर्शक उन्हें अवश्य स्वीकार करते हैं।

फिल्म में काजल चौहान, भनुज सूद और शुभकरण भोपाल मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं। काजल चौहान इससे पहले कई लोकप्रिय टीवी शोज़ में काम कर चुकी हैं। शुभकरण भोपाल भी टेलीविजन से जुड़े रहे हैं, जबकि भनुज सूद कई बड़े विज्ञापनों का जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। तीनों कलाकारों की यह पहली हिंदी फीचर फिल्म है और दर्शकों ने उनके अभिनय की सराहना की है।

फिल्म के निर्देशक राजीव शामलाल सोनी की यह पहली हिंदी फिल्म है। इससे पहले वे ज़ी टीवी के लिए सफल कार्यक्रमों का निर्देशन कर चुके हैं और पंजाबी फिल्मों का भी निर्देशन कर चुके हैं। उनकी भावनात्मक और पारिवारिक कहानी कहने की शैली दर्शकों को पसंद आ रही है।

दर्शकों ने फिल्म की सुंदर लोकेशन्स, मधुर संगीत, भावनात्मक कहानी और पारिवारिक मनोरंजन की जमकर तारीफ की है। खास बात यह रही कि बड़े हॉलीवुड रिलीज़ स्पाइडरमैन जैसी फिल्म के सामने भी “दिल दीवाना हो गया” ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और दर्शकों का प्यार हासिल किया।

फिल्म में मुश्ताक खान, अरुण बख्शी, राजू खेर, बृज गोपाल, मेहुल बुच, गरिमा अग्रवाल, अंजलि गुप्ता और दिव्या द्विवेदी ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।

“दिल दीवाना हो गया” की सफलता इस बात का प्रमाण है कि अच्छी कहानी, मधुर संगीत और सच्चे दिल से बनाई गई फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों तक पहुंचती हैं। ग्रैंडवे प्रोडक्शंस, निर्माता ईशपॉल सिंह चावला, निर्देशक राजीव शामलाल सोनी और पूरी टीम को इस सफलता के लिए हार्दिक बधाई।

भारत से विदेशों तक बढ़ा डॉ. खोजा का प्रभाव, विवेक ओबेरॉय, उदित नारायण और डेज़ी शाह जैसी हस्तियों के साथ साझा कर चुके हैं मंच

वास्तु और ज्योतिष की दुनिया में तेजी से पहचान बना रहे डॉ. खोजा आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दो बार गोल्ड मेडल से सम्मानित और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा चुके डॉ. खोजा ने वर्षों के अध्ययन, शोध और अनुभव के बल पर वास्तु एवं ज्योतिष के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

गुजरात के वलसाड जिले के वापी से मुंबई पहुंचे डॉ. खोजा आज अमेरिका, दुबई, केन्या, मलेशिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड, सऊदी अरब और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों में लोगों को वास्तु और ज्योतिष परामर्श दे रहे हैं।

डॉ. खोजा विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में अभिनेता विवेक ओबेरॉय, अभिनेत्री डेज़ी शाह, गायक उदित नारायण, कुमार सानू, ईशा गुप्ता, संगीता बिजलानी, अभिनेता एवं होस्ट अनु कपूर तथा कॉमेडियन राजीव ठाकुर जैसी हस्तियों के साथ मंच साझा कर चुके हैं।

वास्तु और ज्योतिष के क्षेत्र में डॉ. खोजा ने नाड़ी ज्योतिष, वैदिक ज्योतिष, लाल किताब, अंक ज्योतिष, हस्तरेखा विज्ञान, फेस रीडिंग और वेस्टर्न एस्ट्रोलॉजी जैसे विषयों का गहन अध्ययन किया है। हाल ही में उन्होंने मलेशिया में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में हिस्सा लिया, जहां दुनिया भर के वास्तु विशेषज्ञों, ज्योतिषाचार्यों और आध्यात्मिक विद्वानों के साथ अपने अनुभव साझा किए।

डॉ. खोजा के अनुसार, उन्होंने कई बड़े उद्योगपतियों और व्यावसायिक समूहों के साथ भी कार्य किया है। वे मानते हैं कि भारतीय वास्तु और ज्योतिष के प्रति दुनिया भर में लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

अपने करियर के एक महत्वपूर्ण अनुभव को याद करते हुए डॉ. खोजा बताते हैं कि केन्या की राजधानी नैरोबी में स्थित एक 20 मंजिला इमारत में लगातार हो रही नकारात्मक घटनाओं और मौतों के कारण वहां रहने वाले लोग भयभीत थे। स्थिति ऐसी थी कि पूरी इमारत में केवल लगभग 5 प्रतिशत लोग ही रह रहे थे।

डॉ. खोजा ने करीब 25 दिनों तक वहां रहकर अध्ययन किया और कई वास्तु सुधारों की सलाह दी। उनके अनुसार, समय के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं और आज वही इमारत लगभग पूरी तरह आबाद है।

डॉ. खोजा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव रेडियो मिर्ची का लोकप्रिय ज्योतिष कार्यक्रम रहा, जिसे देशभर में करोड़ों श्रोताओं ने सुना। कार्यक्रम के दौरान उन्हें प्रतिदिन 100 से अधिक कॉल प्राप्त होती थीं, जिनमें लोग अपने व्यक्तिगत, पारिवारिक और व्यावसायिक जीवन से जुड़े सवाल पूछते थे।

डॉ. खोजा का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल भविष्यवाणी करना नहीं, बल्कि लोगों को सकारात्मक सोच और सही दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। उनका मानना है कि सकारात्मक विचार और सही निर्णय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

भारत से लेकर अमेरिका, दुबई, केन्या, मलेशिया, थाईलैंड और अन्य देशों तक अपनी पहचान बना चुके डॉ. खोजा आज वास्तु और ज्योतिष के क्षेत्र में एक चर्चित नाम बन चुके हैं।

दिल दीवाना हो गया : नए कलाकारों, मधुर संगीत और पारिवारिक भावनाओं से सजी एक खूबसूरत प्रेम कहानी

फिल्म: दिल दीवाना हो गया
निर्माता: इश्पॉल सिंह चावला
निर्देशक: राजीव शामलाल सोनी
कलाकार: काजल चौहान, भानूज सूद, शुभकरण भोपाल, राजू खेर, अरुण बक्शी, मुश्ताक खान, बृज गोपाल
अवधि: 2 घंटे 16 मिनट
बैनर: ग्रांडवे प्रोडक्शन्स
रेटिंग: ☆ (3/5)

आज के दौर में जब बॉलीवुड में एक्शन, हिंसा और बड़े बजट की फिल्मों का बोलबाला है, ऐसे समय में निर्माता इश्पॉल सिंह चावला ने एक साफ-सुथरी, भावनात्मक और पारिवारिक रोमांटिक फिल्म बनाने का साहस दिखाया है। दिल दीवाना हो गया केवल एक प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि रिश्तों, भरोसे, त्याग और पारिवारिक मूल्यों को खूबसूरती से प्रस्तुत करने वाली फिल्म है। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने नए कलाकारों पर भरोसा जताकर उन्हें एक बड़ा मंच दिया है, जो काबिल-ए-तारीफ है।

कॉलेज लाइफ, दोस्ती, प्यार और गलतफहमियों पर बॉलीवुड में कई सफल फिल्में बनी हैं, लेकिन दिल दीवाना हो गया अपनी सरल कहानी, भावनात्मक प्रस्तुति और मधुर संगीत की वजह से अलग पहचान बनाने में सफल रहती है। इस सप्ताह हॉलीवुड फिल्म स्पाइडरमैन जैसी बड़ी रिलीज के साथ सिनेमाघरों में आने के बावजूद यह फिल्म अपने दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब रहती है।

फिल्म की कहानी राहुल, नैना और राज नाम के तीन दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। एक ऐसा प्रेम त्रिकोण जिसमें प्यार है, त्याग है, गलतफहमियां हैं और भावनाओं का संघर्ष है। राहुल नैना से प्यार करता है जबकि नैना का झुकाव राज की तरफ है। रिश्तों के इसी उलझे हुए सफर में कहानी आगे बढ़ती है और इंटरवल के बाद कई दिलचस्प मोड़ दर्शकों को बांधे रखते हैं। फिल्म का क्लाइमेक्स भी दर्शकों को चौंकाने में सफल रहता है।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके कलाकार हैं। लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री काजल चौहान ने बड़े पर्दे पर बेहद प्रभावशाली शुरुआत की है। नैना के किरदार में उनकी मासूमियत, भावनात्मक अभिव्यक्ति और स्क्रीन प्रेजेंस प्रभावित करती है। वह हर फ्रेम में सहज और स्वाभाविक नजर आती हैं।

भानूज सूद ने राहुल के किरदार में जान डाल दी है। उनकी अभिनय क्षमता देखकर कहीं से महसूस नहीं होता कि यह उनकी पहली फिल्म है। भावनात्मक दृश्यों से लेकर रोमांटिक पलों तक उन्होंने बेहतरीन संतुलन बनाया है। काजल चौहान और भानूज सूद की केमिस्ट्री भी पर्दे पर काफी अच्छी लगती है।

वहीं शुभकरण भोपाल ने राज के किरदार में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अपने अभिनय से यह साबित किया है कि आने वाले समय में वह इंडस्ट्री में लंबी पारी खेल सकते हैं। सहायक भूमिकाओं में मुश्ताक खान, राजू खेर, अरुण बक्शी, बृज गोपाल, मेहुल बुच, गरिमा अग्रवाल, अंजलि गुप्ता और दिव्या द्विवेदी जैसे कलाकार फिल्म को मजबूती प्रदान करते हैं।

निर्देशक राजीव शामलाल सोनी विशेष बधाई के पात्र हैं। उन्होंने इस फिल्म को सिर्फ एक रोमांटिक कहानी के रूप में नहीं पेश किया बल्कि इसे पारिवारिक मूल्यों और भावनाओं से जोड़कर एक संपूर्ण मनोरंजक फिल्म बनाया है। उनकी कहानी कहने की शैली सरल है लेकिन प्रभावी है। फिल्म कहीं भी अनावश्यक रूप से भटकती नहीं और दर्शकों की रुचि बनाए रखती है।

तकनीकी पक्षों में फिल्म का सबसे मजबूत स्तंभ इसका संगीत है। संगीतकार विष्णु नारायण ने ऐसा मधुर संगीत दिया है जो 90 के दशक की रोमांटिक फिल्मों की याद ताजा कर देता है। आज के शोर-शराबे वाले संगीत के दौर में फिल्म के गीत कानों को सुकून देते हैं। पामेला जैन और यूवी की आवाजों ने गीतों में और भी मिठास घोल दी है।

“तू मेरे दिल की दुआ है”, “दिल की ये गुजारिश है” और “प्यार की धुन” जैसे गीत फिल्म की आत्मा बनकर उभरते हैं। ये गाने फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शकों के साथ बने रहते हैं।

फिल्म की खूबसूरती को बढ़ाने में मनाली की मनमोहक लोकेशन्स का भी बड़ा योगदान है। बर्फ से ढकी पहाड़ियां, हरी-भरी वादियां और रोमांटिक गीतों का फिल्मांकन दर्शकों को दृश्यात्मक रूप से आकर्षित करता है। कई दृश्य पोस्टकार्ड जैसी सुंदरता लिए हुए हैं।

फिल्म के संवाद भी इसकी विशेषता हैं। कुछ संवाद लंबे समय तक याद रह जाते हैं, जैसे—

“खुली वादियों में अगर कोई उगते सूर्य के सामने कोई मन्नत मांगे तो जरूर पूरी होती है।”

“दिल अक्सर धोखा देता है लेकिन दिमाग नहीं।”

“झूठों की दुनिया में सच बोलना सबसे बड़ी बात है।”

ये संवाद फिल्म की भावनात्मक गहराई को और मजबूत बनाते हैं।

कुल मिलाकर, दिल दीवाना हो गया एक ऐसी फिल्म है जो नए कलाकारों की ताजगी, मधुर संगीत, खूबसूरत लोकेशन्स और पारिवारिक भावनाओं को एक साथ लेकर आती है। निर्माता इश्पॉल सिंह चावला का यह प्रयास सराहनीय है कि उन्होंने नए चेहरों को अवसर देते हुए एक साफ-सुथरी और पारिवारिक मनोरंजन से भरपूर फिल्म बनाई है। यदि आप प्यार, रिश्तों, भावनाओं और मधुर संगीत से सजी फिल्मों के शौकीन हैं, तो दिल दीवाना हो गया आपके लिए एक अच्छा सिनेमाई अनुभव साबित हो सकती है।

‘बांद्रा बॉय’ : सच से पहले सुर्खियां चलाने की होड़ पर आधारित एक प्रभावशाली फिल्म

फिल्म “बांद्रा बॉय” सच और अफवाह के बीच की पतली रेखा को प्रभावी तरीके से दर्शाती है। विख्यात टीवी जर्नलिस्ट नीरू शर्मा की बतौर डायरेक्टर पहली फिल्म बताती है कि सुर्खियां सच से पहले चल जाती हैं, और धारणाएं किसी ठोस सबूत से पहले बन जाती हैं। समकालीन विषय पर बनी और सच्ची घटनाओं से प्रेरित यह फिल्म केवल रोमांच नहीं देती, बल्कि दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करती है। चूंकि नीरू शर्मा खुद दो दशकों से मीडिया में रही हैं इसलिए उन्होंने अपने अनुभवों की रौशनी में, मीडिया की कार्यप्रणाली और इमेज बनाने बिगाड़ने के खेल को इस फिल्म में असरदार ढंग से दिखाया है. फिल्म के टाइटल और इसकी कहानी को देखकर दर्शकों के मन मस्तिष्क में फिल्म इंडस्ट्री का एक चर्चित केस सामने आ जाता है मगर डायरेक्टर ने जिस अंदाज से इसे प्रस्तुत किया है वह देखने लायक है.

cast of film

फिल्म में एक मशहूर हस्ती सिद्धार्थ ओबेरॉय (अह्वान कुमार) को पुलिस एक छापे के दौरान पकड़ लेती है मगर उसके पास न तो ड्रग्स मिलते हैं और न ही उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आती है मगर उसे फंसाने का खेल चलता है. उसका बाप देवराज ओबेरॉय (धर्मेंद्र गोहिल) मामले को खत्म करने के लिए करोड़ों की सौदेबाजी करता है इस बीच मीडिया में एक वीडियो क्लिप चला दिया जाता है जिसके बाद आता है कहानी में मोड़. क्लाईमेक्स आपको चौंकाने मे सफल रहता है उसके लिए फिल्म देखनी होगी.

जहां तक एक्टिंग की बात है अह्वान कुमार ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। वहीँ धर्मेंद्र गोहिल की प्रभावशाली अदाकारी किरदार को हकीकत के करीब बनाती है. सहायक कलाकारों में यश पेडणेकर, लोचन बरसागड़े, पवन तिवारी, श्याम थोंबरे, ऐश्वर्या मनोहर और हिमांशी मंडलिया ने भी अपने पात्रों के साथ इन्साफ़ किया है। केवल 21 मिनट की फिल्म होने के बावजूद तमाम किरदार स्क्रीनप्ले का अहम हिस्सा दिखाई देते हैं और यही खूबी बांद्रा Boy को एक कामयाब प्रयास बनाती है. फिल्म एक संपूर्ण फीचर फिल्म का एहसास दिलाती है यही कारण है कि इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय पहचान मिली है। New York International Women Festival में यह फिल्म विनर बनकर उभरी है।

जहां तक निर्देशन का सवाल है हालांकि बतौर डायरेक्टर नीरू शर्मा की यह पहली कोशिश है, मगर इसकी प्रस्तुति में जो मैच्योरिटी नजर आती है, वह इसे एक स्तरीय सिनेमा की सूची में शामिल करवा देती है. फिल्म की पटकथा ऑडिएंस की दिलचस्पी बनाए रखती है और स्टोरी अंत तक अपने उद्देश्य से नहीं भटकती है। मीडिया की भूमिका और जनमत जैसे संवेदनशील विषयों को फिल्म में सहजता से पिरोया गया है.

फिल्म तकनीकी पहलुओं मे भी मजबूत है। कौशल महावीर का असरदार बैकग्राउंड स्कोर हो या आयुष शाह का ग़ज़ब का कैमरा वर्क या संदीप कुरुप की चुस्त एडिटिंग हो सभी ने मिलकर फिल्म को एक प्रभावशाली रूप दिया हैं।

बीस साल तक मीडिया से जुड़ी रही नीरू शर्मा ने ‘बांद्रा बॉय’ में एक ऐसे सब्जेक्ट को ब्यान किया है जो आज के सोशल मीडिया युग में बहुत प्रासंगिक है। फिल्म यह सोचने पर मजबूर करती है कि किस तरह धारणाएं बनती हैं और कई बार हकीकत से पहले ही लोगों के बारे में नतीजा तय हो जाता है। ब्रेकिंग न्यूज देने के चक्कर में कई बार किसी की इमेज धुँधला दी जाती है और उसका पूरा कैरियर दांव पर लग जाता है.

‘बांद्रा बॉय’ नीरू शर्मा के निर्देशन करियर की एक धारदार शुरुआत है। यह कहीं से भी शॉर्ट फिल्म नहीं बल्कि एक फीचर फिल्म लगती है और इसके लिए सारा क्रेडिट डायरेक्टर नीरु शर्मा को जाता है. मीडिया जगत से जुड़े कई लोग मशहूर फिल्म मेकर बने हैं अब उसी सूची में नीरु शर्मा का नाम भी जुड़ गया है. खैर ये तो अभी शुरुआत है उनके निर्देशन में दर्शक कई और फिल्म भी देखेंगे.

फिल्म समीक्षा: ‘बांद्रा बॉय’
निर्देशक : नीरू शर्मा
बैनर: निरुवाना क्रिएशंस
कलाकार: अह्वान कुमार, धर्मेंद्र गोहिल, लोचन बरसागड़े, यश पेडणेकर, पवन तिवारी, श्याम थोंबरे, ऐश्वर्या मनोहर, हिमांशी मंडलिया
रेटिंग: 3.5 स्टार्स

31 जुलाई को रिलीज होगी ‘दिल दीवाना हो गया’, नई प्रतिभाओं को लॉन्च कर रहे हैं निर्माता इशपाल सिंह चावला

प्यार, भावनाओं और पारिवारिक रिश्तों पर आधारित फिल्म “दिल दीवाना हो गया” 31 जुलाई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। ग्रैंडवे प्रोडक्शन्स के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्माण इशपाल सिंह चावला ने किया है। यह फिल्म एक साफ-सुथरी पारिवारिक मनोरंजक कहानी के साथ तीन नए कलाकारों को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में लॉन्च भी कर रही है।

निर्माता इशपाल सिंह चावला का मानना है कि किसी भी फिल्म की सफलता बड़े सितारों से नहीं बल्कि अच्छी कहानी, मधुर संगीत और दमदार अभिनय से तय होती है।

“मैं हमेशा फिल्मों को एक आम दर्शक की नजर से देखता हूं। दर्शक अच्छी कहानी, दिल को छू लेने वाले संगीत और सच्चे अभिनय से जुड़ते हैं। ‘दिल दीवाना हो गया’ के जरिए हमारा प्रयास एक ऐसी पारिवारिक फिल्म देने का है, जिसे परिवार का हर सदस्य साथ बैठकर देख सके। मुझे खुशी है कि इस फिल्म के माध्यम से तीन नए कलाकारों को अवसर मिला है।” – इशपाल सिंह चावला

उन्होंने फिल्म के निर्देशक राजीव श्यामलाल सोनी की भी जमकर तारीफ की।

“राजीव जी ने इस फिल्म को अपना सौ प्रतिशत दिया है। वहीं संगीतकार विष्णु नारायण ने फिल्म के पांचों गीतों को बेहद खूबसूरती से तैयार किया है। मुझे विश्वास है कि ये गीत दर्शकों को लंबे समय तक याद रहेंगे।”

हाल ही में मुंबई में फिल्म का प्रोमो और संगीत लॉन्च किया गया, जहां मीडिया और विशेष मेहमानों ने फिल्म की पहली झलक देखी। प्रोमो और गीतों को शानदार प्रतिक्रिया मिली।

फिल्म का निर्देशन राजीव श्यामलाल सोनी ने किया है, जो कई लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों का सफल निर्देशन कर चुके हैं। फिल्म की शूटिंग मुंबई और मनाली की खूबसूरत लोकेशन्स पर की गई है।

फिल्म के जरिए टीवी अभिनेत्री काजल चौहान बॉलीवुड में कदम रख रही हैं, जबकि भानुज सूद और शुभकरण भोपाल भी अपनी पहली हिंदी फीचर फिल्म के साथ दर्शकों के सामने आ रहे हैं।

“टेलीविजन से फिल्मों तक का सफर मेरा सपना था। मैं इशपाल सिंह चावला जी की आभारी हूं कि उन्होंने मुझ जैसे नए कलाकार पर विश्वास जताया। पूरी टीम ने बहुत मेहनत की है और उम्मीद है कि दर्शकों को हमारा काम पसंद आएगा।” – काजल चौहान

“एक नए कलाकार के लिए ऐसी फिल्म मिलना बेहद खास है। पूरी टीम ने ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया और यह अनुभव मेरे लिए बेहद यादगार रहेगा।” – भानुज सूद

“जब राजीव सर ने मुझे कहानी सुनाई तो मैंने तुरंत फिल्म के लिए हां कह दी। मनाली में शूटिंग करना मेरे लिए और भी खास रहा क्योंकि मेरा परिवार शूटिंग देखने आ सका।” – शुभकरण भोपाल

फिल्म में मुश्ताक खान, अरुण बख्शी, राजू खेर, बृज गोपाल, मेहुल बुच, गरिमा अग्रवाल, अंजलि गुप्ता और दिव्या द्विवेदी भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे।

फिल्म का वितरण करण भाटिया की कंपनी जेबी पिक्चर्स करेगी। नए कलाकारों, खूबसूरत लोकेशन्स, मधुर संगीत और पारिवारिक कहानी से सजी “दिल दीवाना हो गया” 31 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

दुनिया के सबसे बड़े 5211 किलो वजनी पारद शिवलिंग का निर्माण रघुनाथ गुरुजी ने किया, हरिद्वार में सम्पन्न हुई भव्य प्राण प्रतिष्ठा

उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित श्री साई शिव गंगा धाम में दुनिया के सबसे बड़े 5211 किलोग्राम वजनी पारद शिवलिंग की तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा विधि श्रद्धा, वैदिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुई। इस भव्य आयोजन में देशभर से आए 2000 से अधिक श्रद्धालुओं, साधकों, संत-महात्माओं और विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया।

इस विशाल पारद शिवलिंग का निर्माण ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी ने लगभग दस वर्षों की साधना, अनुसंधान और पारद विज्ञान के गहन अध्ययन के आधार पर किया है। शिवलिंग के निर्माण में पारा, चांदी, स्वर्ण (गोल्ड) तथा 108 प्रकार की जड़ी-बूटियों के अर्क का उपयोग किया गया है। आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार यह अपने प्रकार का विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है, जो भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, पारद विज्ञान और ध्यान साधना का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह गुरु गोरक्षनाथ महाराज की परंपरा, गिरनार के पूज्य पीर योगी महंत सोमनाथ बापू के आशीर्वाद तथा पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सकारात्मक ऊर्जा के संदेश को समाज तक पहुंचाना था।

रघुनाथ गुरुजी ने बताया कि यह शिवलिंग केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ध्यान, आत्मचिंतन और सकारात्मक चेतना का केंद्र है। उन्होंने कहा कि वर्षों की साधना और अनुसंधान के बाद तैयार यह शिवलिंग मानव कल्याण और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है। इससे पूर्व वर्ष 2019 में उन्होंने लगभग 10,000 लोगों की सहभागिता के साथ एक विशाल अश्वमेध यज्ञ का आयोजन भी किया था।

तीन दिनों तक चले प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में वैदिक मंत्रोच्चार, यज्ञ, ध्यान साधना, आध्यात्मिक प्रवचन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सद्भाव का महापर्व बताया।

समारोह में अनेक प्रतिष्ठित संत, धर्माचार्य और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इनमें परम पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज, परम पूज्य श्री सुधांशु जी महाराज, परम पूज्य स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज, परम पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, परम पूज्य स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज, श्री दिनेश चंद्र जी, विश्व हिन्दू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी, साध्वी ऋतंभरा जी, आचार्य मनीष जी (HIIMS), सांसद राघव चड्ढा तथा राज्य मंत्री एवं गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम सहित अनेक विशिष्ट अतिथि शामिल रहे।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में उद्योगपति एवं समाजसेवी राजीव बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन की व्यवस्थाओं और समन्वय में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया। राजीव बंसल ने कहा, “मैं साईं बाबा का भक्त हूं। बाबा के आशीर्वाद से मुझे इस दिव्य कार्य का हिस्सा बनने का अवसर मिला। यह मेरे लिए सेवा और श्रद्धा का विषय है।”

समारोह के समापन अवसर पर रघुनाथ गुरुजी ने सभी संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से राजीव बंसल के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति वाला यह विशाल आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हो सका।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह की सफलता में राजीव बंसल, आदरणीय दादाश्री, मनोज तोषनीवाल परिवार, मनोज गोहद, आईजी तकवाले, ममता जिवाल, तरुण भंडारी, अमित अग्रवाल, रमेश सांवरथिया, डॉलरभाई कोटेचा, सुधीर अग्रवाल, राजू ओसवाल, जितेन्द्र राठी सहित अनेक श्रद्धालुओं और सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ रघुनाथ गुरुजी दिव्यांग आत्मनिर्भरता, महिला किसान सशक्तिकरण, पर्यावरण जागरूकता और नवाचार आधारित सामाजिक अभियानों से भी जुड़े हुए हैं। दिव्यांग इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCAI) के माध्यम से देशभर में दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। इस अभियान में DICCAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित अग्रवाल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

समारोह के अंत में “ध्यान से शांति, शांति से सद्भाव और सद्भाव से विश्व कल्याण” का संदेश दिया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे अध्यात्म, विज्ञान, सेवा और मानव कल्याण के संगम का एक ऐतिहासिक आयोजन बताया।
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दो दशक तक फिल्मी दुनिया की खबरें कवर करने वाली नीरू शर्मा ने निर्देशन में रखा कदम, ‘बांद्रा बॉय’ से नई शुरुआत

मनोरंजन जगत की वरिष्ठ पत्रकार नीरू शर्मा, जिन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक हिंदी फिल्म उद्योग और टेलीविजन जगत की रिपोर्टिंग की है, अब फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में कदम रख रही हैं। उनकी पहली लघु फिल्म ‘बांद्रा बॉय’ देश और विदेश के विभिन्न फिल्म समारोहों में प्रदर्शित की जाएगी।

नीरू शर्मा ने अपने पत्रकारिता जीवन में आज तक, न्यूज़ 24, ई-24 और सहारा इंडिया जैसे प्रमुख समाचार संस्थानों के साथ कार्य किया है। वर्षों तक फिल्म जगत को करीब से देखने और समझने के बाद उन्होंने लेखन और फिल्म निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।

इक्कीस मिनट की यह रोमांचक कथा नीरू शर्मा द्वारा लिखी, निर्मित और निर्देशित की गई है। फिल्म इस बात को रेखांकित करती है कि किस प्रकार समाचारों की प्रस्तुति, जनमानस की धारणा और सामाजिक पूर्वाग्रह किसी व्यक्ति के बारे में वास्तविक तथ्य सामने आने से पहले ही निर्णय बना देते हैं।

कहानी फिल्मी हस्तियों, प्रसिद्ध परिवारों से जुड़े युवाओं और उन लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है जिनका संबंध मनोरंजन जगत से होता है। यह दिखाती है कि कैसे कभी-कभी धारणाएं सच्चाई पर भारी पड़ जाती हैं।

नीरू शर्मा का कहना है कि पत्रकारिता के दौरान उन्होंने अनेक ऐसे प्रसंग देखे, जहां लोगों ने पूरी जानकारी सामने आने से पहले ही अपनी राय बना ली।

उन्होंने कहा, “पत्रकार के रूप में मैंने देखा है कि धारणाएं कितनी तेजी से बनती हैं और कई बार वही लोगों के लिए सत्य बन जाती हैं। ‘बांद्रा बॉय’ उसी विषय को कहानी के माध्यम से सामने लाने का प्रयास है।”

फिल्म जगत के जानकारों का मानना है कि पत्रकारिता से फिल्म निर्देशन की ओर बढ़ना अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है। ऐसे में नीरू शर्मा की यह शुरुआत विशेष महत्व रखती है।

‘बांद्रा बॉय’ केवल एक रोमांचक कथा नहीं है, बल्कि यह समाज में बढ़ती उस प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाती है, जहां सुर्खियों, अटकलों और तेजी से फैलने वाली चर्चाओं के आधार पर लोगों के बारे में राय बना ली जाती है।

फिल्म ‘कोरगज्जा’: निर्माता ने निर्देशक सुधीर अटावर को भेंट किया लग्जरी फ्लैट

निर्देशक सुधीर अटावर की फिल्म ‘कोरगज्जा’ पिछले जनवरी में रिलीज़ के लिए पूरी तरह तैयार थी और इसका भव्य ऑडियो लॉन्च ज़ी म्यूज़िक के बैनर तले आयोजित किया गया था। हालांकि, अंतिम समय में फिल्म को त्रिआयामी प्रारूप में परिवर्तित करने की घोषणा की गई, जिसके कारण इसकी रिलीज़ स्थगित कर दी गई।

वर्तमान में फिल्म का त्रिआयामी कार्य कोच्चि और चेन्नई में तेज़ी से चल रहा है। निर्देशक सुधीर अटावर के अनुसार, “यह फिल्म तकनीकी स्तर पर अंतरराष्ट्रीय मानकों की किसी भी फिल्म के बराबर तैयार की जा रही है।”

फिल्म को लेकर अंतरराष्ट्रीय वितरण एजेंसियों की बढ़ती रुचि से उत्साहित निर्माता त्रिविक्रम सपल्या ने निर्देशक सुधीर अटावर को उनकी तीन वर्षों की अथक मेहनत के सम्मानस्वरूप लगभग 1.75 करोड़ रुपये मूल्य का शोभा डेवलपर्स का एक शानदार तीन शयनकक्ष वाला फ्लैट उपहार में दिया है।

फिल्म पहले से ही छह भाषाओं में तैयार की जा रही थी, लेकिन अब इसमें असमिया, चीनी और अंग्रेज़ी संस्करण भी जोड़े गए हैं।

शुक्रवार को नए फ्लैट में गृह प्रवेश समारोह आयोजित किया गया, जिसके बाद श्री सत्यनारायण व्रत पूजा संपन्न हुई। वहीं रविवार को बेंगलुरु में अपेक्षाकृत दुर्लभ माने जाने वाले कोरगज्जा दैव के ‘अगेलु सेवा’ अनुष्ठान का आयोजन पत्रकारों और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में किया गया।

वरिष्ठ अभिनेत्री भाव्या ने कोरगज्जा दैव को प्रिय व्यंजनों का भोग अर्पित किया। इनमें कुचलक्की चावल, कुल्थी और बसले की सांभर, बांगड़ा मछली की करी, कच्चे आम का अचार, चिकन सुक्का, ताड़ी सहित कई पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। निर्देशक की पत्नी राजश्री सुधीर ने सभी व्यंजन तैयार किए, जबकि निर्माता त्रिविक्रम सपल्या और कार्यकारी निर्माता विद्याधर शेट्टी ने भाव्या की सहायता की।

पत्रकार वार्ता के दौरान अभिनेत्री भाव्या ने कहा, “कोरगज्जा ने मुझे दैव के प्रति और अधिक श्रद्धावान बना दिया है। मैं फिल्म के हर आयोजन का हिस्सा रही हूं और टीम के साथ परिवार के सदस्य की तरह जुड़ी रही हूं। फिल्म में मैंने ‘रानी पंजंदायी’ की भूमिका निभाई है, जो कोरगज्जा के लिए पहली बार अगेलु सेवा करती है। आज वास्तविक जीवन में भी निर्देशक ने मुझे अपने नए फ्लैट में कोरगज्जा के लिए अगेलु सेवा करने का सौभाग्य दिया है। शायद इस फिल्म में मुझसे अधिक सौभाग्यशाली कोई नहीं है।”

निर्माता त्रिविक्रम सपल्या ने बताया कि फिल्म का चीनी भाषा में भी डब संस्करण तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हांगकांग, बीजिंग और अन्य स्थानों की अंतरराष्ट्रीय वितरण एजेंसियां फिल्म को विदेशों में रिलीज़ करने के लिए आगे आ रही हैं। फिल्म का बजट 40 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, लेकिन हमारी व्यावसायिक उम्मीदें और उत्साह लगातार बढ़ रहे हैं। इसी खुशी के प्रतीक के रूप में मैंने तीन वर्षों से इस फिल्म पर काम कर रहे निर्देशक को यह फ्लैट भेंट किया है।”

कार्यकारी निर्माता और संपादक विद्याधर शेट्टी ने बताया कि फिल्म को अगस्त में रिलीज़ करने की तैयारियां चल रही हैं।

मुंबई कॉमिक कॉन में भारत आत्मन स्टूडियोज और राज कॉमिक्स ने किया दो ऐतिहासिक कॉमिक्स का भव्य लॉन्च

मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित मुंबई कॉमिक कॉन 2026 में इस बार कॉमिक्स प्रेमियों को एक बेहद खास अनुभव देखने को मिला। भारतीय सुपरहीरोज नागराज, सुपर कमांडो ध्रुव, डोगा और बांकेलाल के लिए मशहूर राज कॉमिक्स ने अपने नए प्रकाशन “भारत आत्मन स्टूडियोज” के तहत गीतकार और लेखक विष्णु शर्मा की लिखी दो विशेष कॉमिक्स का एक्सक्लूसिव लॉन्च किया। इस लॉन्च ने कॉमिक्स जगत में इतिहास, राष्ट्रभक्ति और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नए अंदाज़ में प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।

इस विशेष लॉन्च का सबसे बड़ा आकर्षण वह कॉमिक्स रही जिसके कवर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi का चित्र दिखाई देता है। यह कवर उनके 75वें जन्मदिन के अवसर पर पहली बार जारी किया गया था। कॉमिक्स में दिखाई गई कहानी भारतीय क्रांतिकारी और प्रवासी स्वतंत्रता सेनानी Shyamji Krishna Varma के जीवन से जुड़ी है। कवर पर मोदीजी के हाथ में दिखाई देने वाला अस्थि कलश इसी ऐतिहासिक प्रसंग का हिस्सा है, जिसने कॉमिक्स प्रेमियों और इतिहास में रुचि रखने वाले युवाओं के बीच विशेष उत्सुकता पैदा की।

इस पूरी पहल के पीछे दूरदर्शी सोच राज कॉमिक्स के सह-संस्थापक Sanjay Gupta की रही, जिन्होंने दशकों तक भारतीय कॉमिक्स उद्योग को नई पहचान दी। हजारों कॉमिक्स के लेखक और संपादक रह चुके संजय गुप्ता ने कहा कि भारत आत्मन स्टूडियोज का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि भारत के भूले-बिसरे नायकों, क्रांतिकारियों और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक आधुनिक माध्यमों से पहुँचाना है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के 75वें जन्मदिन पर इस कॉमिक्स कवर को जारी करने के पीछे उनकी प्रेरणा केंद्र सरकार द्वारा WAVES के दौरान मिले सम्मान और प्रोत्साहन से भी जुड़ी रही।

भारत आत्मन स्टूडियोज के प्रकाशक Vasu Gupta ने इस मौके पर कहा कि यह केवल एक कॉमिक्स प्रकाशन नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति को युवाओं तक पहुँचाने का सांस्कृतिक मिशन है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में स्टूडियो “भारत के वीर”, “पौराणिक कथाएँ”, “भारत के भूले-बिसरे नायक”, “राज्य-वार गाथाएँ”, “बाल गाथा”, “पाठशाला विरासत”, “मिट्टी की आवाज़” और “धर्म के योद्धा” जैसी कई महत्वाकांक्षी कॉमिक्स और पुस्तक श्रृंखलाएँ लेकर आने वाला है।

कॉमिक्स लेखक विष्णु शर्मा के लिए यह कॉमिक्स जगत में पहला कदम है, लेकिन साहित्य, इतिहास, पत्रकारिता और गीत लेखन में उनका लंबा अनुभव इस प्रोजेक्ट में साफ दिखाई देता है। उनकी चर्चित पुस्तक “गुमनाम नायकों की गौरवशाली गाथाएं” पहले ही पाठकों के बीच लोकप्रिय रही है। इसके अलावा वे नीलेश मिश्रा के चर्चित शो “योद्धा” के लिए भी वीर सैनिकों की कहानियाँ लिख चुके हैं। दिलचस्प बात यह रही कि विष्णु शर्मा स्वयं बचपन से नागराज और सुपर कमांडो ध्रुव के बड़े प्रशंसक रहे हैं और अब उन्हीं की दुनिया से जुड़कर इतिहास आधारित कॉमिक्स लिखना उनके लिए भावनात्मक अनुभव बन गया।

इस कॉमिक्स श्रृंखला के विजुअल्स और कवर डिज़ाइन में कलाकार Sushant Panda और Basant Panda का महत्वपूर्ण योगदान रहा। टीम फिलहाल कई नई कॉमिक्स परियोजनाओं पर एक साथ काम कर रही है, जिन्हें आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से लॉन्च किया जाएगा।

मुंबई कॉमिक कॉन में स्टॉल नंबर 39, 40 और 41 पर मौजूद इस लॉन्च को दर्शकों और कॉमिक्स प्रेमियों से शानदार प्रतिक्रिया मिली। बच्चों को भारतीय वीरों और इतिहास की प्रेरणादायक कहानियाँ रोचक अंदाज़ में पढ़ाने की चाह रखने वाले माता-पिता के लिए यह सीरीज विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही। भारतीय कॉमिक्स की दुनिया में यह पहल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रभावना को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी।