/सुरों की विरासत को सलाम: नवीन कुमार की “द जर्नी ऑफ बांसुरी” का भव्य विमोचन सुभाष घई के हाथों

सुरों की विरासत को सलाम: नवीन कुमार की “द जर्नी ऑफ बांसुरी” का भव्य विमोचन सुभाष घई के हाथों

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सुर, ताल और भावनाओं से सराबोर एक यादगार शाम में प्रसिद्ध बांसुरी वादक नवीन कुमार ने अपनी बहुप्रतीक्षित डेब्यू पुस्तक “द जर्नी ऑफ बांसुरी” का लोकार्पण प्रतिष्ठित व्हिसलिंग वुड्स इंटरनेशनल में किया। इस पुस्तक का विमोचन मशहूर फिल्मकार Subhash Ghai के हाथों हुआ, जिसकी गरिमामयी उपस्थिति में सुप्रसिद्ध गायक Sukhwinder Singh और विश्वप्रसिद्ध पर्कशनिस्ट Sivamani भी शामिल रहे।

यह आयोजन एक खूबसूरत राग की तरह गूंजता रहा, जिसमें शब्द, संगीत और यादों का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस मौके को और खास बनाते हुए नवीन कुमार ने बांसुरी पर लाइव प्रस्तुति दी, जिसमें “तू ही रे”, फिल्म हीरो का अमर गीत और धुरंधर 2 का एक विशेष अंश प्रस्तुत किया। हर सुर मानो कविता की तरह बहता हुआ उनकी बांसुरी से जुड़ाव को दर्शा रहा था।

शाम का मुख्य आकर्षण एक शानदार जुगलबंदी रही, जहां सिवमणि की जोशीली ताल और नवीन कुमार की मधुर बांसुरी ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद सुखविंदर सिंह ने “कृष्णा” गीत की ऊर्जावान प्रस्तुति देकर माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

इस अवसर पर नवीन कुमार ने कहा, “यह किताब सिर्फ लिखी नहीं गई है, बल्कि जी गई है। यह मेरे वर्षों के स्व-अध्ययन, प्रयोग और बांसुरी के साथ गहरे संबंध का परिणाम है।”

सुभाष घई ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, “सच्ची कला जुनून और समर्पण से जन्म लेती है, और नवीन कुमार की यात्रा इसका सुंदर उदाहरण है। ‘द जर्नी ऑफ बांसुरी’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि हर कलाकार के लिए प्रेरणा है।”

एक साधारण और सांस्कृतिक परिवार में जन्मे नवीन कुमार ने अपने दिवंगत माता-पिता को अपनी प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा, “मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे उनकी कला और संस्कार विरासत में मिले।” उन्होंने अपनी पत्नी किरण और बच्चों राहेल नवीन और जीन नवीन का भी आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर श्रीमती उषा श्रीनिवासन शाहणे के योगदान को भी सराहा गया, जिन्होंने इस पुस्तक के प्रूफरीडिंग और संपादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नवीन कुमार ने उन्हें विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके बिना यह पुस्तक संभव नहीं थी।

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रकाशक और लेखक आकाश भाबट का भी विशेष उल्लेख किया गया, जिन्होंने नवीन कुमार की इस पहली पुस्तक को अपनाया और प्रोत्साहित किया।

एक भावुक क्षण में नवीन कुमार ने अपने मानस गुरु सुभाष घई को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “उनका सच्चे कलाकारों के प्रति प्रेम प्रेरणादायक है। बिना किसी पूर्व परिचय के उन्होंने हमेशा मेरा मार्गदर्शन और समर्थन किया।”

कार्यक्रम का समापन एक प्रेरणादायक माहौल के साथ हुआ, जहां संगीत, कहानी और भावनाओं का सुंदर संगम देखने को मिला—जो “द जर्नी ऑफ बांसुरी” के सार को पूरी तरह दर्शाता है।